Hironmoy Gogoi

सरकारी नौकरी छोड़, गांव में खोला ऑनलाइन ढाबा। 300 लोगों को दे दी जॉब

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दोस्तों आज कल के युवा जहां  परीक्षा में अच्छे मार्क्स नहीं आने के डर से आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। वहीं 23 साल का एक लड़का हिरणमोय (Hironmoy Gogoi)अपनी पढ़ाई पूरी नहीं करने के बावजूद गांव के लोगों की ज़िन्दगी को सफल बनाने और रूरल इकोनॉमी के बढ़ाने के उद्देश्य से मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़ दी। अब वह गांव में ऑनलाइन ढाबा खोलकर कमाने के साथ 300 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहा है।

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मां से मिला हिरणमोय गोगोई को हौंसला
हिरणमोय गोगोई ने एक इंटरव्यू में  बताया कि जब वह 15 साल का था तो एक दुर्घटना में उसके भाई की मौत हो गई थी। इसके तीन साल बाद ही उसकी मां की भी मौत हो गई। मां के चले जाने पर वो टूट सा गया था। फिर मैंने सोचा कि मेरी मां जैसी देश में करोड़ों मां हैं जो पैसे के अभाव में जरूरी सुविधाओं से वंचित हैं। यहां से मुझे इनके लिए कुछ करने की चाहत हुई।

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मां के इलाज में खर्च हो गए सारे पैसे

हिरणमोय गोगोई कहते हैं कि बीमार मां के इलाज में घर की माली हालत खराब हो गई। आगे की पढ़ाई के लिए हमारे पास पैसे नहीं थे। पापा के सारे बैंक अकाउंट खाली हो गए थे। इसलिए मैंने हायर एजुकेशन नहीं करने का फैसला किया। मेरा मानना था कि हायर एजुकेशन के बदले अगर कोई टेक्निकल कोर्स किया जाए तो उसका ज्यादा फायदा मिलेगा।

हिरणमोय गोगोई ने एसटीसीडब्ल्यू 95 बेसिक सेफ्टी ट्रेनिंग कोर्स में एडमिशन लिया। इसे पूरा करने के बाद मर्चेंट नेवी की ट्रेनिंग ली। इस कोर्स को करने का पूरा खर्च 70,000 रुपए आया। कोर्स पूरा होने के बाद वह नौकरी के लिए मलेशिया गया। मलेशिया में 2 महीने नौकरी के बाद वे देश लौट आए। कोलकाता में एक बीपीओ में करीब डेढ़ साल नौकरी से जमा किए गए पैसे को लेकर अपने गांव लौट गए।

Hironmoy Gogoi
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10 रुपए में शुरू किया घर का खाना का बिज़नस 

साल 2016 में गोगोई ने अपना बिजनेस शुरू किया था। उसके पास शुरू में एक गैस सिलेंडर और एक स्टोव था। घर में रखे चावल, दाल और सब्जियों से ‘घर का खाना’ की शुरुआत हुई। गोगोई बताते हैं कि उन्हें सिर्फ नमक खरीदने के लिए 10 रुपए खर्च करने पड़े थे। बाकी सामान घर से लगा था। गोगोई पहले घर में खाना बनाकर शहर में लोगों को खाना पहुंचाते और फिर शहर में ही घर का खाना बनाना शुरू किया।

गोगोई कहते हैं कि पहले तो फेसबुक से इसका प्रचार किया। इसके माध्यम से पहला ऑर्डर हमें 120 रुपए का मिला था। धीरे-धीरे बिजनेस में जब फायदा होने लगा तो उसे अपने बिजनेस को ऑनलाइन करने का आइडिया आया और फिर ‘घर का खाना’ का वेबसाइट बना।

Hironmoy Gogoi
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सिर्फ 9 महीने में 4.70 लाख कमाए 

जून 2016 में ‘घर का खाना’ लॉन्च हुआ। फिलहाल इसके 6 आउटलेट असम में मौजूद हैं। पहले साल में बिजनेस का टर्नओवर 4.70 लाख रुपए रहा। गोगोई का लक्ष्य मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 10 लाख रुपए से ज्यादा का टर्नओवर हासिल करना है।

अब दे रहे है फ्रेंचाइजी
Hironmoy Gogoi ने अपने बिजनेस की फ्रेंचाइजी देना शुरू किया है। दिल्ली, गाजियाबाद और आगरा में घर का खाना की फ्रेंचाइजी शुरू होने वाली है। जो व्यक्ति ‘घर का खाना’ की फ्रेंचाइजी लेना चाहते हैं उन्हें 1 लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे। हालांकि, जो बेरोजगार हैं वो फ्री में इसकी फ्रेंचाइजी ले सकते हैं। गोगोई कहते हैं कि उनका मकसद ज्यादा से ज्यादा रोजगार पैदा करना है। उनको इस साहसिक कार्य के लिए कई अवार्ड भी मिल चुके हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=u8pcBt9JjkU